●शहीद (1965 )
मनोज कुमार को बचपन में एक नाटक में भगत सिंह नहीं बनने का मलाल था ,युवा होने पर जद्दोजहद और मेहनत के बाद एक स्क्रिप्ट लिखी और अपने दोस्त केवल कश्यप को दिखाई और ज़िद की कि मुझे इसी पर एक फ़िल्म बनानी है इस प्रकार शहीद (1965 ) फ़िल्म बनी और मनोज जी का भगत सिंह बनने का सपना भी पूरा हुआ उनकी मेहनत रंग लाई इस फ़िल्म को नेशनल अवार्ड मिला लेकिन मनोज कुमार ने इस सफलता का सारा क्रेडिट अपने दोस्त केवल कश्यप को दिया
भगत सिंह के साथी बटुकेश्वर दत्त, जिन्होंने दिल्ली असेम्बली में बम विस्फोट किया था उन्हीं की कहानी पर आधारित इस फिल्म की पटकथा पण्डित दीनदयाल शर्मा ने लिखी थी। यह भी महज़ एक संयोग कहा जायेगा कि जिस साल सन् 1965 में यह फ़िल्म रिलीज़ हुई थी उसी साल बटुकेश्वर दत्त का निधन हो गया। इस कारण कहानी और पटकथा लेखन के लिये बाद में दीनदयाल शर्मा को अकेले ही पुरस्कृत किया गया था। 13वें राष्ट्रीय फ़िल्म अवार्ड की सूची में शहीद फ़िल्म ने हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार जीता। इसके अलावा इस फ़िल्म ने राष्ट्रीय एकता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म के लिये नर्गिस दत्त पुरस्कार भी अपने नाम किया किया।
शायद बहुत कम लोग जानते है की "जोगी हम तो लुट गये तेरे प्यार में जाने तुझको खबर कब होगी" गाने में मनोज कुमार की पत्नी शशि गोस्वामी ने ढोलक पर थाप लगायी थी भगत सिंह के जीवन पर बनी फिल्मो में मनोज कुमार की "शहीद " सर्वश्रेष्ठ फिल्म है। शहीद फिल्म के प्रीमियर पर महान क्रांतिकारी भगत सिंह की माँ विद्यावती जी को मनोज कुमार ने विशेष तौर पर फिल्म देखने के लिए आमंत्रित भी किया था।