साइकिल ने बचाई थी मुलायम सिंह की जान
वीपी सिंह ने दे दिए थे एनकाउंटर के आदेश
आप जानते हैं समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह साइकिल क्यों है.. इसलिए कि इसी साइकिल ने कभी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की जान बचाई थी.. वो साइकिल पर सवार होकर इटावा से दिल्ली न भागे होते तो तो उनका एनकाउंटर हो जाता... तत्कालीन मुख्य्मंत्री वीपी सिंह ने उनके एनकाउंटर के आदेश दे दिए थे..
ये कहानी अस्सी के दशक की है जब सीएम विश्वनाथ प्रताप सिंह ने उत्तर प्रदेश में डकैत उन्मूलन अभियान शुरू कर रखा था..आरोप लगाए गए कि मुलायम सिंह यादव के न केवल डकैत गिरोहों से सक्रिय संबंध है..बल्कि डकैती और हत्या के मामलों में वो शामिल भी हैं.. डकैत लूट का माल उन्हें देते है.. इसी आधार पर वीपी सिंह ने मुलायम सिंह यादव के एनकाउंटर का आदेश दिया लेकिन कुछ पुलिस वालों ने ही इस बात की जानकारी उन तक पहुंचा दी...मुलायम सिंह यादव ने बिना एक मिनट की देरी किए ही इटावा छोड़ने का फैसला कर लिया. साइकिल उठाई और सड़क छोड़ खेत-खलिहान और पगडंडियों के रास्ते से ही दिल्ली निकल लिए
मुलायम सिंह तब 1980 में विधानसभा चुनाव हार गए थे लेकिन वो पूर्व विधायक थे.. राम नरेश यादव और बनारसीदास की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके थे. तब भी उनकी जान पर खतरा था..यही नहीं उनका राजनीतिक भविष्य पर पहले से खतरे के बादल मंडरा रहे थे... मुलायम सिंह के अपराधों की लिस्ट एक अंग्रेजी अखबार के पहले पेज पर छपवा दी गई थी..इसमें उनके खिलाफ हत्या और डकैती के 32 मामलों की डिटेल भी दी गई थी. अख़बार में मुलायम सिंह की हिस्ट्रीशीट छपने पर लोकदल अध्यक्ष चौधरी चरण सिंह उनसे बेहद नाराज हुए..लोकसभा चुनाव में उनकी टिकट काट दी गई...केसी त्यागी और हरिकेश प्रताप बहादुर सिंह जैसे कई नेता उन्हें पार्टी से निकालने की मांग कर रहे थे.. लेकिन मुलायम सिंह का एकमात्र सहारा भी चौधरी चरण सिंह ही थे..एनकाउंटर से बचने के लिए मुलायम सिंह साइकिल से छिपते,-छिपाते दिल्ली पहुंचे और चौधरी चरण सिंह के चरणों में लोट गए.. कहा 'चौधरी साहब मेरी जान बचा लीजिये..वीपी सिंह ने मेरे एनकाउंटर का आदेश दे दिया है. सच भी था वीपी सिंह की पुलिस रेलवे स्टेशन , बस स्टैंड,सड़कों पर, रिश्तेदारों के घर हर जगह मुलायम सिंह की तलाश कर रही थी..मुलायम सिंह यादव खेत और पगडंडियों के रास्ते गांव-गांव होते हुए इटावा से दिल्ली भाग सकते हैं ऐसा पुलिस ने सोचा भी नहीं था.
खैर मुलायम सिंह चौधरी चरण सिंह की शरण में आ ही गए थे तो उन्होंने 'कोटि विप्र वध लागेहि जेहू.. आए शरण न त्यागहु तेहु 'का पालन किया..
चौधरी चरण सिंह ने पहला काम यह किया कि मुलायम सिंह यादव को विधान परिषद का सदस्य बनाकर लोकदल से विधान मंडल दल का नेता घोषित कर दिया. विधान मंडल दल का नेता घोषित होते ही मुलायम सिंह यादव को पुलिस प्रोटेक्शन मिल गया..जो उत्तर प्रदेश पुलिस उन्हें एनकाउंटर के लिए खोज रही थी , वही पुलिस उन की सुरक्षा में लग गई. हालांकि इसके बाद भी मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में अपने को सुरक्षित नहीं मानते थे. डर के मारे वो दिल्ली में चौधरी चरण सिंह के घर में ही रहते रहे.
जब कभी सत्र होता तब ही वो सुरक्षा कर्मियों के साथ महज हाजिरी देने के लिए विधानसभा में उपस्थित होते थे और वहां से वो सीधे दिल्ली ही वापस जाते थे. मुलायम सिंह को राहत तन मिली ज़ब 28 जून ,982को वीपी सिंह ने इस्तीफ़ा दिया..वीपी सिंह को इस्तीफ़ा इसलिए देना पड़ा कि 20 मार्च, 1982 को बांदा में डकैतों ने उनके सगे भाई जस्टिस चंद्रशेखर प्रसाद सिंह और उनके 14 साल के बेटे की हत्या कर दी। वीपी सिंह के भाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सिटिंग जज थे. इसके बाद एक और घटना घट गई..27-28 जून, 1982 की रात डकैतों के गिरोह ने कानपुर में 10 यादवों को गोलियों से भून डाला;
