कउआहँकनी रानी
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(जब हम लोग बच्चे थे, 1967 के आसपास, तब ये कथा सुनते थे। यह हम लोगों की दादी कहती थी। इसे हम एक पुस्तक के पन्ने पर छपा हुआ देखे। उसके लेखक या संकलन करे वाला के नाम हमें नहीं मिला। वह भोजपुरी में आप लोगों की सेवा में प्रस्तुत है।- अंजनी उपाध्याय)
एगो राजा रहन । उनका सात गो रानी रही। छव जानी के लड़िका ना भइल । बाकिर छोटकी रानी के लड़िका होखे के रहे त छवो रानी के बहुत डाह भइल कि अब राजा छोटकी रानी के आउर मनिहें ।
जब छोटकी रानी के नउआँ महीना चलल त राजा से एक दिन कहली कि कहीं हमरा दरद होखे लागल आ रउरा शिकार खेले जाए लगली त हम का करब। राजा एगो घंटा देलन कि एकरा के बजा देवू त हम चल आएब ।
राज जब चल गइलन त रानी जाँचे खातिर घंटा बजा देली । राजा चल अइलन । पूछलन त रानी कहली कि जाँचे खातिर बजवलों हैं। राजा फेर शिकार पर चल गइलन। रानी फेर घंटा बजा देली। राजा फेर चल अइलन । आ अबकी खिसिया के गइलन ।
एने छवो रानी चमइन के बोला के ढेर धन देके कहली कि छोटकी रानी के लड़िका होखे त बोग दिह आ ईटा-पत्थल ध दिह कि इहे भइल ह। चमइन मान गइली ।
छोटकी रानी के जब दरद भइल त घंटा पिटते रह गइली, राजा ना अइलन । उनका बेटा-बेटी दूनो भइल, जउनाँ, त चमइन बोरा के ईटा-पत्थर ध देलस ।
जब राजा अइलन त पूछलन कि कवन लड़िका भइल ह । त छवो रानी कह देली कि ई'टा पत्थल भइल बा, जाके देखीं। राजा छोटकी रानी के घर से निकाल देलन । आ एगो अलगा छोटहने घर में रख देलन आ कहलन कि भर दिन कउना हाँकत रहिह । रानी कउआँहकनी हो गइली ।
आ ओने ऊ दूनू लड़िकन के एगो कोंहार लेके पोसे लागल। जब ओकनी के सेयान भईलन स त कोंहार माटी के हाथी-घोड़ा बनाके देलस कि जा खेल लोग ।
एक दिन रानी लोग पोखरा में नहात रहे आ दोसरा घाट पर ऊ दूनू लड़िका खेलत रहन स आ कहत रहन स कि
"माटी के हाथी, माटी के घोड़ा, पानी पिउ"।
रानी लोग सुन के कहल कि "माटी के हाथी माटी के घोड़ा कहीं पानी पियेला !" त ऊ लड़िका कहलन स कि "रानी कहीं ईटा-पत्थल बियाली !"
बस, छवो रानी घरे आके खटवांस पटवांस ले लेली कि "जब ले हमनी क कोंहार के लड़िकन के करेजा पर ना नहाएव, ना उठव।"
तब राजा जल्लाद के बोला के कहलन कि ऊ लड़िकन के करेजा निकाल के ले आव । जल्लाद सब ओकनी के मार के करेजा निकाल ले अइलन, त रानी लोग उठ गइली ।
ऊ दूनू के करेजा घूरा पर बीग दियाइल, त लड़िका आम के गाछ भइल बा लड़की केदली के गाछ भइल ।
जब केदली में फूल लाग गइल त राजा देख के मोहा गइलन आ सिपाही के कहलन कि फूल तूड़ ले आव। सिपाही जब फूल तूड़े गइल त केदली के गाछ कहलस कि-
"सुनऽ सुनऽ ए बमोला भऽइया ! बाबा के सिपाही फूल लोढ़ हो !"
त अमोला कहलन कि -
"सुनऽ सुनऽ ए केदली बहिना ! डाढ़-पात देहू ना आकाश हो !"
तब केदली के गाछ के डाढ़-पात उपर उठ गइल । सिपाही लवट के चल आइल ।
तब रानी लोग फूल तूड़े गइली। त फेर केदली कहली कि-
"सुनऽ सुनऽ ए अमोला भइया ! छवो रानी फूल लोढ़े हो !"
त अमोला कहलन कि -
"सुनऽ सुनऽ ए केदली बऽहिना ! डाढ़-पात देहू ना आकाश हो ।"
फेर केदली के गाछ के डाढ़-पात उपर चल गइल । त राजा अपने फूल तूड़े गइले । त केदली कहली कि-
"सुनऽ सुनऽ ए अमोला भऽइया ! बाबा अभागा फूल लोढ़े हो!"
त अमोलो कहलन कि-
"सुनऽ सुनऽ ए केदली बऽहिना ! डाढ़-पात देहू ना आकाश हो ।"
ना केदली के गाछ के डाढ़-पात ऊपर चल गइल।
त अन्त में राजा कहलन कि कउआहॅकनी के फूल तूड़े के भेजल जाय। त जब ऊ फूल तूड़े गइली त केंदली फेरू कहली कि-
"सुनऽ सुनऽ ए अमोला भइया ! अम्मा अभागी फूल लोढ़े हो !"
त अमोल। कहलन कि-
"सुनऽ सुनऽ ए केदली वऽहिना ? डाढ़-पात देह ना झुकाय हो !"
डाढ़-पात भुइयाँ में सोहर गइल। छोटकी रानी भर फाँड़ फूल तूड़ के दे देली । जब राजा पूछलन त कहली कि ऊ गाछ दूनो हमार बेटा-बेटी ह, रउआ गाछ उखाड़ के देखलीं ।
बबजब गाछ उखाड़ल गइल त ओह में से राजा के बेटा-बेटी निकलल लोग । तब राजा के सब बात के पता चल गइल। ऊ छवो रानी के आ चमइन के गड़हा खोनवा के मूड़ी निकाल के गड़वा देलन आ ओह लोग के मूड़ी पर दही धरवा के कुत्ता से कटवावल गइल। छोटकी रानी जे कउआ हंकनी कहात रहली रानी भइली। आई दूनू लड़िका लोग राजा के बेटा-बेटी बनके सुख से रहे लागल लोग ।
